Ed. Anil Kumar Mishra / Manish Kumar
Description
भारतीय नवजागरण में अनेक लोगों ने अपनेअपने स्तर पर श्रेष्ठ योगदान दिया। ऐसे ही अनन्य महापुरुषों की पंक्ति में एक नाम रवींद्रनाथ टैगोर का भी है। यह संभव
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तः एक विलक्षण व महत्त्वपूर्ण नाम है; क्योंकि इसी व्यक्ति ने भारतीय; विशेषकर बँगला साहित्य को विश्व के सामने प्रस्तुत किया। उनके अद्भुत लेखन तथा कल्पनाशक्ति ने ही उन्हें ‘विश्व पुरुष’ के रूप में पहचान दी। वे भारतीय संस्कृति एवं शिक्षापद्धति के पर्याय पुरुष माने जाते हैं। उन्होंने स्वतंत्रता पूर्व भारत में शिक्षा और साहित्य का गौरव बढ़ाया। उनका नाम विश्व साहित्य में एक अलग पहचान रखता है; क्योंकि वे भारतीय साहित्यजगत् तथा एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता थे; जो उन्हें उनके कालजयी काव्य ‘गीतांजलि’ के लिए दिया गया।उल्लेखनीय है कि उन्होंने भारत के राष्ट्रगान ‘जनगणमन’ के साथसाथ बांग्लादेश के राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ की रचना भी की। इसलिए विश्व में उन्हें ‘कविगुरु’ और ‘गुरुदेव’ जैसे आदरणीय उपनामों से संबोधित किया गया।प्रस्तुत पुस्तक में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के नाना विषयों पर प्रकट विचारों और उनकी सोच को वर्णित किया गया है। टैगोर को संपूर्ण रूप में जाननेसमझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।
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Genres
Biography & Memoir
Tags
Biography & Autobiography
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789383111763
ISBN-10: 9383111763
Language
Hindi
No. of Pages
152
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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