Ramvilas Sharma
Description
द्विवेदी जी ने अपने साहित्यिक जीवन में सबसे पहले अर्थशास्त्र का गहन अध्ययन किया और बड़ी मेहनत से 'संपत्ति शास्त्र' नामक पुस्तक लिखी ! इसीलिए द्विवेदी ज
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ी बहुत-से ऐसे विषयों पर टिप्पणियाँ लिख सके जो विशुद्ध साहित्य की सीमाएँ लाँघ जाति हैं ! इसके साथ उन्होंने राजनीतिक विषयों का अध्ययन किया और संसार में हो रही राजनीतिक घटनाओं पर लेख लिखे ! राजनीति और अर्थशास्त्र के साथ उन्होंने आधुनिक विज्ञानं से परिचय प्राप्त किया और इतिहास तथा समाजशास्त्र का अध्ययन गहराई से किया ! इसके साथ भारत के प्राचीन दर्शन और विज्ञानं की ओर ध्यान दिया और यह जानने का प्रयत्न किया कि हम अपने चिंतन में कहाँ आगे बढे और कहाँ पिछड़े हैं ! परिणाम यह हुआ कि हिंदी प्रदेश में नवीन सामाजिक चेतना के प्रसार के लिए वह सबसे उपयुक्त व्यक्ति सिद्ध हुए ! उनके कार्य का मूल्याङ्कन व्यापक हिंदी नवजागरण के सन्दर्भ में ही संभव है ! डॉ. रामविलास शर्मा द्वारा रचित इस कालजयी पुस्तक के पांच भाग हैं ! पहले भाग में भारत और साम्राज्यवाद के सम्बन्ध में द्विवेदी जी ने और 'सरस्वती' के लेखकों ने जो कुछ कहा है, उसका विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है ! दूसरे भाग में रूढ़ीवाद से संघर्ष, वैज्ञानिक चेतना के प्रसार और प्राचीन दार्शनिक चिंतन के मूल्याङ्कन का विवेचन है ! तीसरे भाग में भाषा-समस्या को लेकर द्विवेदी जी ने जो कुछ लिखा है, उसकी छानबीन की गई है ! चौथे भाग में साहित्य-सम्बन्धी आलोचना का परिचय दिया गया है ! पांचवे भाग में द्विवेदी-युग के साहित्य की कुछ विशेषताओं की ओर संकेत किया गया है ! बहुत-सी समस्याएँ जो द्विवेदी जी के समय में थीं, आज भी विद्यमान हैं ! इसीलिए आज के संदर्भ में भी इस पुस्तक की सार्थकता और उपयोगिता अक्षुण्ण है !
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Genres
No genres specified
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Subjects
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 2002
ISBN
ISBN-13: 9788126703753
ISBN-10: 812670375X
Language
Hindi
No. of Pages
405
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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