राम नरेश यादव
Description
भारत में संविधान, चुनाव, संसद, न्यायपालिका, पंचायतें और नागरिक अधिकार मौजूद हैं, फिर भी सवाल है-क्या लोकतंत्र सचमुच नागरिक के रोजमर्रा जीवन में उतर पा
...
या है?
"लोकतंत्र का लोकतंत्रीकरण: भारत की अधूरी क्रांति" इसी प्रश्न की पड़ताल करती है। पुस्तक लोकतंत्र को केवल चुनावी व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिक गरिमा, अधिकार, न्याय, भागीदारी और समान अवसरों से जुड़ी जीवंत व्यवस्था के रूप में देखती है। लेखक सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत असमानताओं के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, श्रम, मीडिया, डिजिटल तकनीक और स्थानीय स्वशासन जैसे क्षेत्रों का विश्लेषण करते हैं।
पुस्तक केवल आलोचना तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पंचायत-केंद्रित प्रशासन, नागरिक-संपर्कहीन प्रशासन, पंचायत-आधारित प्रारंभिक न्याय, अखिल भारतीय तकनीकी एवं स्वास्थ्य सेवाओं और ग्राम स्वराज 2.0 जैसे व्यावहारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करती है।
यह कृति उन पाठकों के लिए है जो भारत के लोकतंत्र को चुनावों से आगे बढ़ाकर नागरिक जीवन की वास्तविक संरचनाओं में स्थापित होते देखना चाहते हैं।
भारत को लोकतंत्र छोड़ने की नहीं, लोकतंत्र को जीवन में उतारने की आवश्यकता है। यही लोकतंत्र का लोकतंत्रीकरण है।
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