Nagarjun
Description
कुम्भीपाक नामक नरक की रचना जिन जीवन-स्थितियों से हुई होगी, नागार्जुन का यह उपन्यास उन्हीं के शब्दांकन का परिणाम है ! एक ही मकान में रहनेवाले छः किराये
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दारो की जीवनचर्या पर केन्द्रित यह उपन्यास हमारे 'विकासमान' नागर-जीवन के जिस सामाजिक यथार्थ की परतें खोलता है, प्रकारांतर से वह समूचे भारतीय जीवन का यथार्थ है, क्योंकि स्त्री के प्रति पदार्थवादी नजरिये की कहीं कोई कमी नहीं ! आर्थिक अभावों में पिसती अनेकानेक निर्दोष जिवानेच्छाएं किस प्रकार भोगवाद की भट्टी में झोंक दी जाती हैं, उनकी पीड़ा और मुक्तिकामी छटपटाहट को नागार्जुन ने गहरी आत्मीयता से उकेरा है ! साथ ही, नागार्जुन यहाँ उस दृष्टि को प्रस्थापित करते हैं जो स्त्री की सामाजिक भूमिका और मानवीय गरिमा के प्रति सचेत है !
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Reading Moods
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Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Sep, 2007
ISBN
ISBN-13: 9788126713318
ISBN-10: 8126713313
Language
Hindi
No. of Pages
139
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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