Osho
Description
कृष्]ण क्षणवादी हैं। समस्]त आनंद की यात्रा क्षण की यात्रा है। कहना चाहिए यात्रा ही नहीं है, क्]योंकि क्षण में यात्रा कैसे हो सकती है, क्षण में सिर्फ ड
...
ूबना होता है। समय में यात्रा होती है क्षण में आप लंबे नहीं जा सकते, गहरे जा सकते हैं। क्षण में आप डुबकी ले सकते हैं क्षण में कोई लंबाई नहीं है, सिर्फ गहराई है। समय में लंबाई है, गहराई कोई भी नहीं है इसलिएजो क्षण में डूबता है, वह समय के पार हो जाता है। जो क्षण में डूबता है वह इटरनिटी को, शास्]वत को उपलब्]ध हो जाता है। कृष्]ण क्षण में है और साथ ही शाश्]वत में हैं। जो क्षण में है, वह शाश्]वत में है।
Read more
Diamond Pocket Books (P) Ltd.