Lalit Mohan Rayal
Description
रचना का कथानक उदारीकरण से पूर्व का है। तीव्र जीवनशैली, उपभोक्ता संस्कृति तब तक लोकजीवन से नदारद थी। सो युवाओं को मन-रंजन के लिए व्यूह रचना की दरकार पड
...
़ती थी। कथाभूमि मध्य हिमालय-शिवालिक के संधिस्थल पर बसे अंचल की है। लोक-संस्कृति, लोक व्यवहार व अपनेपन की झलक रचना में यत्र-तत्र दिखाई पड़ती है। घटनाक्रम लेखक के कैशोर्य-युवावस्था के संधिकाल का है; जो कुछ भी अनुभव किया, उसका यथार्थ चित्रण हुआ है। चित्रण जीवंत है, जिससे रचना असर पैदा करती है, चमत्कृत करती है। उसी साँचे को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें ढलकर वह ऐसा बन पड़ा है। रचना उसी भावभूमि का विस्तार है।
Read more
Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
PRABHAT PRAKASHAN PVT Limited
Month-Year
Feb, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789386054869
ISBN-10: 9386054868
Language
Hindi
No. of Pages
184
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?