Sarveshwar Dayal Saxena
Description
नयी कविता की लोक–सम्पृक्ति के प्रतिनिधि कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कुआनो नदी और जंगल का दर्द से पूर्ववर्ती सम्पूर्ण काव्य–साधना का पहला खण्ड कविताएँ
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–1 कविताओं का यह दूसरा खण्ड है । इसमें, पूर्व प्रकाशित, कवि के दो संग्रहों (एक सूनी नाव और गर्म हवाएँ) की कविताएँ सम्मिलित हैं । इन कविताओं में कवि के निजी जीवन और समसामयिक सामाजिक, राजनीतिक जीवन की त्रासदी परस्पर गुम्फित है । ये कविताएँ राजनीति से भागती नहीं क्योंकि वह आज के जीवन का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक मतवाद से उनका अलगाव अवश्य है । दरअसल, सर्वेश्वर के तर्इं इनसान से बड़ा कुछ भी नहीं हैµन ईश्वर, न प्रकृतिµ सबका क’द उनके यहाँ एक है । सर्वेश्वर की कविताएँ भाषा से दुर्व्यवहार करनेवाले कवियों की इधर बढ़ती हुई भीड़ के लिए एक सबक भी है । वे अपनी निजी दुनिया में ले जाकर, सामाजिक ‘सच्चाई’ से सूक्ष्म सम्पर्क करती हुर्इं, पाठक के मन में भाषा के प्रति एक धड़कता हुआ रिश्ता बनाती हैं । एक सूनी नाव और गर्म हवाएँµये शीर्षक ही सर्वेश्वर की काव्य–यात्रा के बदलाव को सूचित करते हैं । पर सर्वेश्वर की कविता में जो ‘गुस्सा’ धीरे–धीरे अपेक्षाकृत अधिक मुखर हुआ है, उसके पीछे भाषा पर पड़ने वाले दबाव की स्थिति से एक गहरा रचनात्मक मुकाबला है । कविता में निषेधी भाषा की तीव्र उपस्थिति कुछ करने और बदलने की इच्छा से अनुप्रेरित है % सिर्फ गुस्से से ही नहीं ।
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