संपादक पिंकी सिंघल
Description
आपके अपने इंकलाब पब्लिकेशन की इस नई शुरुआत के लिए आप सभी काव्य मनीषियों से मिली शुभकामनाओं के लिए आप सभी गुणीजनों का तहे दिल शुक्रिया।
आप सभी रचनाका
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रों की हौसला अफ़जाई और प्रोत्साहन से ही इस अनूठे साझा काव्य संग्रह काव्याश्रम को मूर्त रूप प्रदान किया जा सका है। अपनी रचनाओं से काव्याश्रम की खूबसूरती बढ़ाने का सम्पूर्ण श्रेय आप सभी सुधिजनों को जाता है।
काव्याश्रम इतने आकर्षक,प्रभावी एवम मनोहर काव्य संग्रह के रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत हो रहा है क्योंकि इसमें समाहित है आत्मा आप सभी रचनाकारों के एहसासों की,आप सभी के अंतर्मन में छिपे उन भावों की,जिन्हें इस संग्रह के माध्यम से खुलकर अभिव्यक्त होने का एक वातावरण मिला है।
ज़िंदगी में आने वाला हर दूसरा शख्स कुछ नया सिखाता है...
शुक्र है कि समेटना हमें अपना हर जज़्बात आता है...
...पिंकी सिंघल
संग्रह में सम्मिलित प्रत्येक रचना स्वयं में कुछ न कुछ विशेषता लिए हुए है।हृदय के उद्गारों को अपनी तूलिका के जरिए पन्नों पर उकेर सभी रचनाकारों ने इस बार बेहतरीन नवीन तरीकों से अपनी लेखनी को सुसज्जित करने का सफ़ल प्रयत्न किया है।
निसंदेह सभी रचनाएँ अत्यंत भावपूर्ण,सटीक एवम प्रवाहपूर्ण हैं।कवियों की मौलिकता कविताओं को जीवंतता प्रदान कर रहीहैं और उनका यही गुण इस संग्रह को आम से ख़ास बनाता है।
करने दुनिया की सैर हम जब भी निकलते हैं...
हर कदम पर क्यों लोग रंग बदल कर मिलते हैं..
...पिंकी सिंघल
बचपन की अटखेलियों की बात हो या यौवन की उमंगों की,नारी शक्ति का गुणगान हो अथवा देशभक्ति का जज़्बा,राष्ट्र के शौर्य की गाथा का वर्णन हो या फिर प्रेम के विविध रूपों का जिक्र, काव्याश्रम जीवन के हर पहलू,हर अनुभव को बारीकी से खुद में समेटे हुए है।
मौसम बदलें गर लाख मगर ख़ुद को न कभी बदलना तुम...
सब पर सदा स्नेह लुटाना और अपनों के प्यार में सदा संवरना तुम...
...पिंकी सिंघल
सभी रचनाएं बेहद सरल,सहज और स्वाभाविक भाषा शैली में लिखी गई हैं जो संग्रह को अति सुगम्य एवम ग्राह्य बनाती हैं।प्रकृति के प्रेम को आधार बनाकर उसे मानव जीवन से जोड़ने वाली रचनाएं अति सराहनीय हैं।
भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है,यह बताने का भी सुंदरतम प्रयास कवियों ने किया है।साथ ही,कर्म को सर्वोपरि मानकर जो भी रचनाएँ लिखी गई हैं, वे सभी अत्यंत मार्मिक एवम धरातलीय हक़ीक़त से जुड़ी जान पड़ती हैं।ग्रामीण परिवेश के सौंदर्य का बखान करती कृतियाँ संग्रह की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा रही हैं।कहने का तात्पर्य यह है कि संग्रह में शामिल एक से बढ़कर एक रचनाएँ काव्याश्रम को सफ़लता के शीर्ष तक पहुंचाने का मादा रखती हैं।
सभी रचनाओं को पढ़कर एक बात तो साबित होती है कि हिंदी भाषा के लिए आपके दिल में जो सम्मान और स्थान है वह साहित्यप्रेमी होने के साथ साथ आपके देशप्रेमी होने पर भी विशेष बल देता है।
हिंद का दूजा नाम है हिंदी सबकी आन बान और शान है हिंदी...
जोड़े रखती सबको संग अपने अनेकता में एकता का नाम है हिंदी...
...पिंकी सिंघल
शिक्षा,साहित्य,संस्कार और ऐसे ही अनेकों क्षेत्रों पर लिखकर आप सभी कवियों ने इस संग्रह में अपनी कलम का अद्भुत जादू बिखेरा है।
मां सरस्वती से यही कामना है कि उनकी कृपा आप सभी साहित्यकारों पर सदैव इसी प्रकार बनी रहे और आप अपनी लेखनी से साहित्य जगत को समृद्ध बनाते रहें।
- पिंकी सिंघल
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