संपादक पिंकी सिंघल
Description
काव्यानुभूति साझा काव्य संग्रह में शामिल सभी रचनाकार साहित्य जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।
अधिकतर सभी रचनाकार अनेक अन्य साझा संग्रह में अपनी
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भागीदारी दिखा चुके हैं । इन सभी की सुंदर रचनाओं से सजा हुआ यह साझा काव्य संग्रह आज आपके समक्ष है जिसमें जीवन के अधिकतर सभी पहलुओं,सभी मनोभावों पर आधारित रचनाओं का समावेश है जिसकी वजह से इस संग्रह को एक विशेष स्वरूप प्राप्त होता है।
यहाँ जहाँ एक और किसी रचनाकार ने अपनी रचना के माध्यम से जीवन के दर्शनशास्त्र को बखूबी पाठकों के समक्ष रखने का प्रयास किया है वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य रचनाकारों की रचनाएँ मार्मिकता लिए हुए हैं, कुछ रचनाओं में बेटियों को बेटों के समान मान रचनाकार ने अपने मन के भावों को सुंदरता से उकेरा है ,कुछ अन्य रचनाओं में जीवन में श्राद्ध का वास्तविक महत्व और अर्थ क्या है इस बात पर प्रकाश डाला गया है ।
आया वो दिन भी जब माता - पिता को बच्चों ने
बोझ समझ वृद्धाश्रम में वास दिया
तड़प कर माता-पिता ने बच्चों की इस इच्छा को भी
उसकी खुशी मान घर के सुख के अरमानों का श्राद्ध किया
सभी रचनाकारों ने जीवन की सच्चाई को मद्देनजर रखते हुए अपनी रचनाओं को जिस सौंदर्य के साथ सजाया है वह निसंदेह ही काबिले तारीफ है।इस काव्य संग्रह की भाषा शैली सुंदर ,सटीक ,सहज, सरल और चित्रात्मकता का गुण लिए हुए है जो पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम सिद्ध होंगी। सभी रचनाकारों की रचनाएँ पढ़कर मन पुलकित हो जाता है क्योंकि सभी रचनाएँ सार्थकता का गुण लिए हुए हैं।
इंकलाब प्रकाशन द्वारा कोई साझा काव्य संग्रह प्रकाशित हो और उसमें नारी शक्ति पर कोई रचना शामिल ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता।काव्यानुभूति साझा काव्य संग्रह में शामिल कुछ रचनाकारों ने भी नारी महिमा पर बहुत सुंदर रचनाएँ रची हैं जिसमें उन्होंने नारी के विभिन्न रूपों यथा-माँ,पत्नी,बेटी,बहन इत्यादि का खूबसूरत ढंग से वर्णन किया है।
नर नारी में भेद नहीं
नर नारी एक समान
बिगइ़ता देख परिवार
नारी साधती तीर कमान
सभी रचनाओं की विषय वस्तु को बहुत ही सहज ढंग से पूरी तरह से सोच समझ कर वर्णित किया गया है और
यही कारण है कि ये सभी रचनाएँ सीधे पाठकों के दिल में उतरने की सामर्थ्य रखती हैं।
कुछ रचनाकारों ने मन के भावों को दर्शाती हुई रचनाएँ लिखी हैं जिसमें उन्होंने अपने दिल में उमइ़ते भावों को,
अपनी व्याकुलता को अतिसुंदर शब्दों में बयान किया है। सभी रचनाएं स्वयं में कोई ना कोई सुंदर संदेश भी लिए
हुए हैं जो समाज में बदलाव लाने की ताकत भी रखती हैं।
काया मिट्टी की है, माटी में मिल जाना रे
खारा तन का है पानी, सब बह जाना रे
जीवन में प्रेम, त्याग और समर्पण का क्या महत्व है ,इन सभी पहलुओं को लेकर जिन भी रचनाकारों ने अपनी
रचनाएँ इस अद्भुत साझा काव्य संग्रह को भेंट की हैं उन्हें शत-शत नमन है ।
कब तक मुझे यूँ ही सताती रहोगी
यादों के भँवर में इूबोती रहोगी
अब मान भी जाओ
यूँ ना मुझे तड़पाया करो
एक प्रकार से देखा जाए तो काव्यानुभूति साझा काव्य संग्रह अत्यंत भावुक संग्रह है क्योंकि इसमें शामिल रचनाएँ हमें वास्तविक जीवन की सच्चाई से जोड़ने में सक्षम हैं। कुछ रचनाएँ अति हृदयस्पर्शी बन पड़ी हैं जिन्हें पढ़कर पाठक असल जीवन में होने वाली घटनाओं को सोचने पर मजबूर हो जाएगा।
प्रभु भक्ति और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं को पढ़ने के बाद यही कहा जा सकता है कि संग्रह में शामिल रचनाकारों के हृदय में देश के प्रति जो प्रेम और भक्ति पूर्ण जज्बा है,उसका बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता।
आगे बढ़कर समाज से तुम गैरों की फरियाद बनो
जीवन में कुछ बनना है तो चंद्रशेखर आजाद बनो
प्रकृति पर आधारित रचनाएँ स्वत:पाठकों के हृदय को छू लेंगी। समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी सच्ची भावनाओं को व्यक्त करने का सभी रचनाकारों ने सफल प्रयास किया है। समस्त रचनाएँ अपनी भाषा शैली में अत्यंत भावपूर्ण हैं क्योंकि उनकी भाषा एक प्रकार की कसावट है।
इन सभी खूबियों को देखकर यही कहा जा सकता है कि जब आप इस पुस्तक को पढ़ना शुरू करेंगे तो आप इसे पूरी पढ़े बिन स्वयं को कदाचित नहीं रोक पाएंगे।
- पिंकी सिंघल
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