संपादक पिंकी सिंघल
Description
काव्य सलिल स्वयं में अभिव्यक्ति एवम भावों का प्रवाह लिए हुए वह अमृत है जिसका रसपान करते ही नेत्रों की ज्योति को अमरत्व प्राप्त होता है। काव्य सलिल में
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सम्मिलित सभी रचनाकारों ने अपनी सर्वोत्तम रचनाएं एक ऐसे संग्रह को सौंपी हैं जिसकी शोभा का वर्णन चंद शब्दों में किया ही नहीं जा सकता।
कवियों ने अपनी सुंदर रचनाओं में अपनी आत्मा रख इस बार ऐसा जादुई सृजन किया है कि उनकी कृतियां पाठकों के दिलों को आह्लादित कर उनको भाव विभोर कर देंगी।सभी रचनाओं में काव्य रसपान इस कदर समाहित है कि लग रहा है मानों कविताएं अभी मुखरित हो उठेंगीं।
संग्रह में जहां एक तरफ़ सामाजिक संस्कारों की कड़ी में नारी के वजूद को ढूंढती खूबसूरत रचना है तो वहीं दूसरी तरफ़ रिश्तों को जान से ज्यादा
तरजीह देने वाली उन औरतों की व्यथा पर भी कलम चलाई गई है जिनको समाज में तिरस्कृत कर उनके चरित्र पर प्रश्न चिह्न लगा दिया जाता है।
किसी के चरित्र को पल भर में आंक सको
उतनी काबिलियत बोलो कहां से लाओगे..
औरत की ही कोख से लेकर तुम खुद जन्म क्या उसी की परवरिश पर प्रश्न चिह्न लगाओगे..
नफरतों को मिटा प्रेम का अलख जगाने वाली,दोस्ती का रिश्ता दिल से निभाने वाली एवम पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश देने वाली कविताओं ने संग्रह को इसका वजूद प्रदान किया है।प्रेम पर अभिव्यक्ति प्रदान करने वाले सभी रचनाकारों ने सच ही कहा है कि प्रेम में बहुत शक्ति होती है और जग में प्रेम से बड़ी कोई सौगात नहीं है क्योंकि प्रेम पवित्र आत्माओं का पवित्र मिलन होता है
प्रेम से बनते सारे रिश्ते
प्रेम से बसते सारे रिश्ते
प्रेम न हो तो सांसें रुकती
चल ना पाते ज्यादा रिश्ते
कहीं कवि मन ख्वाबों के ताने बाने बुन उनमें ही सुकून ढूंढ रहा है तो कहीं कर्म को ही जीवन का आधार मानकर मानव को अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित कर रहा है।वैश्विक आपदा को केंद्र में रखकर रची गई सभी रचनाएं शानदार हैं एवम निर्विवाद रूप से खुद में इतिहास रचने का सामर्थ्य रखती हैं।प्रकृति,मां,ईश्वर,नारी,बेटी,आसूं,शिक्षा, ख़्वाब,देश,बचपन,दर्द,हिम्मत,प्रेम,त्याग,समय,समर्पण,बलिदान,परिवार एवम रिश्ते नाते आदि सभी पहलुओं को संग्रह में शामिल रचनाकारों ने अलग अलग विधाओं यथा कविता,मुक्तक,शायरी, ग़ज़ल इत्यादि के माध्यम से जिस खूबसूरती के साथ रखा है,उसका आभास रचनाएं पढ़कर स्वयं ही हो जाता है।
हौंसले पर आधारित सभी रचनाएं निसंदेह पाठकों में आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित करेंगी।
गिरकर फिर खुद ही संभलना होता है
परेशानियों से अकेले ही निकलना होता है..
समझ जाते हैं जो वक्त रहते ये एक बात सुना है ज़माना उन्हीं के कदमों में होता है..
रचनाओं की भाषा सहज,सरल एवम जनमानस को मद्देनजर रखकर प्रयोग की गई जान पड़ती है ताकि अधिक से अधिक पाठक रचनाओं को पढ़कर ग्राह्य कर सकें तथा असीम आनंद का अनुभव कर सकें।इंकलाब परिवार महादेव से यही प्रार्थना करता है कि आप सभी सुधिजनों का साहित्यिक सफ़र नित नई ऊंचाइयों को छुए एवम मां वीणापाणि की कृपा आप सभी रचनाकारों की लेखनी पर सतत् निरंतर यूं ही बनी रहे।
- पिंकी सिंघल
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