संपादक पिंकी सिंघल
Description
जिस प्रकार किसी भी काव्य संग्रह की सुंदरता का संपूर्ण श्रेय निसंदेह उसमें शामिल काव्य रचनाओं को जाता है, ठीक उसी प्रकार इंकलाब प्रकाशन द्वारा प्रकाशित
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इस खूबसूरत साँझा काव्य संग्रह,"काव्य किरण" को सौम्य रूप देने में उन सभी मनीषियों का योगदान है जिनकी सरल, सुंदर और भावपूर्ण रचनाओं ने सांझे रूप में संग्रह को चाँद-तारों सा सजाया है।
सभी कविताओं में रचनाकारों ने भावों के रूप में दिल निकाल कर रख दिया है जिसका कोई मुकाबला ही नहीं है। जहाँ एक कवि अपने हृदय के प्रेम उद्गारों को कुशलतापूर्वक पन्ने पर उतारता है, वहीं दूसरा कवि खुद को अनगढ़, नीरस बता अपनी कविताओं के माध्यम से पाठकों को संतोष प्रदान कर उन्हें काव्य रस में सराबोर करने में निपुण है।
कविता में गायत्री मंत्र के जाप से जहाँ एक ओर संकलन को शक्ति मिलती है, वहीं माँ शारदे जैसी सुंदर, सौमिल रचना संग्रह को जीवंतता प्रदान करती है।कहीं कवि मन प्रेमी को पत्थर बता रेगिस्तान में भी सुंदर जीवन की असीम संभावनाएं देखता है तो कहीं कविमन कांटों भरी राह को संघर्ष का नाम दे सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए सभी को प्रेरित करता है।
यह केवल कवि हृदय की कोमलता ही है जो पेड़-पौधों को जीवन का आधार मान प्रकृति के कण कण की सुरक्षा चाहता है।समय के साथ चलने और सदैव गतिशील बने रहने को ही कर्म बता रचनाकार ने मनुष्य को अंतरद्वंद से बाहर निकल आगे बढ़ने को प्रोतसाहित किया है।
कविताओं में जहां प्रभु की महिमा का गुणगान किया गया है,वहीं मातृभूमि पर शीश नवाने वाले शहीदों के परिवारों की मनःस्थिति का मार्मिक बखान भी बखूबी किया गया है।कभी कवि मन प्रेमी प्रेमिका की मुलाकात का प्रयास करता है तो कभी महसूस भर करने में ही पूरा जीवन जीने वाले प्रेमी हृदय के अधूरे प्रेम के एहसास को चित्रित करने की कोशिश।
जीवन में स्वदेश भाषा प्रेम संस्कारों,संस्कृति,संतुष्टि और मानसिक शांति को ही प्रमुख मान जीवन जीने को कह रचनाकर ने फल की इच्छा किए बिन कर्म करते रहने को तवज्जो दी है।मासूम बुलबुल और प्यारी गौरैया की ख़ामोशी से साफ़ तौर पर बताया गया कि अब वो पहले जैसा पर्यावरण कहां रहा है,होली के रंग भी कोराेना के चलते फीके ही जान पड़ते हैं और आपसी प्रेम और सौहार्द देखने को मानव तरस गया है।
कोई भी काव्य संग्रह बिन नारीशक्ति और आदिशक्ति की महिमा गान के बिना निश्चित रूप से अधूरा ही लगता है परंतु यहां मातृशक्ति को नमन कर कवि ने दर्शाया है कि नारी को पूजने से वैभव और यश आता है।कवि की कल्पना कहां कहां तक जा सकती है,उस पर रचनाकारों ने अपने अंदाज से एक से बढ़कर एक रचनाएं लिखी हैं जो कि अत्यंत सराहनीय हैं।
देशभक्ति से ओतप्रोत ,छल से बहुत दूर कवि हृदय उस संसार की कल्पना करता है जो बेरोजगारी,महंगाई, जातिवाद जैसी अनगिनत समस्याओं से मुक्त हो,जहां केवल और केवल प्रेम की वर्षा होती हो।
- पिंकी सिंघल
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