Dr Om Prakash Sah Priyamvad
Description
ओम प्रकाश साह ‘प्रियंवद’ सामाजिक कार्यकर्ता की तरह हैं। कॉलेज में शिक्षक होते हुए जीवन का बड़ा समय साहित्य के पठन-पाठन में लगाया। लेकिन इसी के समानांत
...
र वे लेखन में लगे रहे, पत्रकारिता करते रहे। शिक्षक संघ में सक्रिय रहे। चुनाव लड़कर म्युनिसिपल कमिश्नर बने। जमालपुर रेल कारखाने के मजदूरों की लड़ाई में लेखन के माध्यम से खुद को शामिल रखा। कारखाना में अफसरशाही और घोटालों के खिलाफ लिखते रहे। इसलिए इनकी रचना की दुनिया में संघर्ष की ताप और देर तक बहनेवाले पसीने की तीखी गंध महसूस कर सकते हैं। कविताओं में आदमी और समय की टकराहट से निकलनेवाली उस ऊष्मा का आभास कर सकते हैं, जो लड़ने और बढ़ने की ताकत देता है। इनकी प्रेम कविताएँ जमालपुर पहाड़ी के नीचे मिलनेवाले गेरू की तरह हैं, जो चाहती हैं, उसे कोई प्रेमिका उठाए और सहसा अपने प्रेमी का नाम लिख दे। गेरू घिसकर खत्म हो जाना चाहता है प्रेम की खातिर। डॉ. प्रियंवद कारखाना मजदूरों के शहर के कवि हैं। पहाड़ किनारे के कवि हैं। इसका विस्तार इनकी रचनाओं में है।
Read more