Mohanlal Gupta
Description
इस पुस्तक में मुगल काल में स्थापित राजपूताना की सबसे छोटी हिन्दू रियासत किशनगढ़ का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास लिखा गया है। मुगलों ने भारत की अनेक ब
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ड़ी रियासतों में सामंती असंतोष को जन्म देकर छोटी-छोटी रियासतों की स्थापना करवाई थी जिनमें किशनगढ़ की बहुत छोटी रियासत भी सम्मिलित थी। इस रियासत के राजा बहुत वीर एवं पराक्रमी सिद्ध हुए। उन्होंने न केवल देश में अपितु देश की सीमाओं से बाहर जाकर भी मुगलों के लिए बहुत सा क्षेत्र जीता। जब किशनगढ़ की मुगलों से ठन गई तब महाराजा रूपसिंह ने औरंगजेब के हाथी पर बंधे हौदे की रस्सियां काट डालीं थीं। कहा जाता है कि एक बार जब राजा रूपसिंह भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में बैठा था, तब भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उसके स्थान पर ड्यूटी करने आए। किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमति कृष्णभक्त थी जिसने औरंगजेब से विवाह करने से मना कर दिया। किशनगढ़ का राजा सावंतसिंह कृष्णभक्ति करने के लिए राज्य छोड़कर वृंदावन में जाकर रहने लगा। किशनगढ़ की चित्रकला देश भर में अपने अनूठे लावण्य के लिए प्रसिद्ध हुई। राजा सावंतसिंह की प्रेयसी इस चित्रकला का आधार बनी। किशनगढ़ में वैष्णवों की विश्वप्रसिद्ध सलेमाबाद पीठ की स्थापना हुई। और भी बहुत कुछ पढ़िए किशनगढ़ रियासत के बारे में इस पुस्तक में।
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Genres
History
Tags
Arborist Merchandising Root
Self Service
History
Asia
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Repro India Limited
Month-Year
May, 2018
ISBN
ISBN-13: 9788193565728
ISBN-10: 819356572X
Language
Hindi
No. of Pages
218
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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