Ashish Kumar Gupta, Chandra Prakash & Brajesh Kumar Gupta
Description
प्रत्येक व्यक्ति की भावनाएं, संवेदनाएं, आवश्यकताएं एवं महत्वाकांक्षाएं अलग-अलग होती हैं और व्यक्ति समाज में इन्हीं के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ा रहता
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है। किन्नरों की भावनाएं एवं महत्वाकांक्षाएं तो एक स्त्री की हैं, पर शरीर न तो पुरूष का और न औरत का। शारीरिक अपूर्णता के कारण एक व्यक्ति समाज में किस तरह का तिरस्कारपूर्ण जीवन व्यतीत करने पर मजबूर है, यह पुस्तक इसी विषय पर आधारित एक प्रयास है। यह पुस्तक किन्नरों के सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक-धार्मिक जीवन के व्यावहारिक पक्षों की यर्थाथता का चित्रण करती है जिसमें उन्हंे हर स्थान, समय एवं परिस्थितियों मंे अपमान सहना पड़ता है परन्तु फिर भी वे एक सामाजिक प्राणी की तरह जीवन-यापन कर रहे हैं।
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