Joseph Addison
Description
एडीसन कल्पना के आनंद को दो भागों में विभक्त करते हैं। प्रथम श्रेणी का आनंद ऐसे पदार्थों से उत्पन्न होता है, जो हमारे नेत्रें के सामने है और द्वितीय श्
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रेणी का आनंद दृश्य पदार्थों के केवल ध्यान मात्र से उत्पन्न होता है। हकीकत में वे पदार्थ हमारी आंख के सामने नहीं रहते, वरन स्मृति में लाए जाते हैं, अथवा कल्पना द्वारा रमणीय रूपों में निर्मित किए जाते हैं। दृष्टि ही कल्पना को सामग्री प्रदान करती है, इसलिए कल्पना का आनंद भी मूलतः दृष्टि से ही उत्पन्न होता है।
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