Himanshu Narayan
Description
न जाने कितने हर्फ़ और लफ्ज़
और कितनी सारी बातें,
और किस्से, कहानियाँ,
दास्तान-ए-हक़ीक़त,
अशआर, रदीफ़ और काफ़िये...
सब के सब क़ैदी,
धुँधले अँधेरे क़ैदखान
...
े की ज़मीन,
दीवारों और
सलाख़ों से लगे,
लेटे, खड़े,
यूँ ही पड़े,
थके-थके से,
जागते, सोते, ऊँघते,
एक दूसरे को गालियाँ बकते.
यही है
कुछ लिख पाने की अबाध उत्कंठा (बे-इन्तेहा हसरत),
और न लिख पाने की कठोर (बेरहम) यंत्रणा...
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