Banbhatt
Description
संस्कृत के प्रख्यात गद्यकार बाणभट्ट सातवीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के समय में हुए। उनकी दो कृतियाँ हर्षचरितम् तथा कादम्बरी संस्कृत गद्य का अपार वैभ
...
व और सौंदर्य ही नहीं, भारतीय कथा का अद्भुत संसार भी हमारे सामने खोलती हैं। बाणभट्ट की कादम्बरी पारंपरिक कथा की विधा को अद्वितीय योगदान भी है और आधुनिक उपन्यास की विधा का एक भारतीय मानक भी प्रस्तुत करती है। इसके औपन्यासिक कलेवर और विस्तार के कारण ही मराठी में उपन्यास के अर्थ में ‘कादम्बरी’ शब्द एक जातिवाचक संज्ञा भी बन गया। प्रस्तुत उपन्यास बाणभट्ट कीकादम्बरी का एक साहसिक और नवीन रूपांतर है, जिसे संस्कृत के जाने-माने विद्वान् तथा साहित्यकार राधावल्लभ त्रिपाठी ने रचा है। यह कादम्बरी पर आधारित एक मौलिक नई कृति होने के कारण भारतीय कथा के आस्वाद के नए धरातल प्रस्तुत करता है।
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Genres
No genres specified
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Subjects
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Radhakrishna Prakashan
Month-Year
Jan, 2003
ISBN
ISBN-13: 9788171198597
ISBN-10: 8171198597
Language
Hindi
No. of Pages
158
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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