मानसी पाठक वर्मा उर्फ “नन्हा परिंदा”
Description
“कुछ यूँ ही” जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों, रिश्तों की संवेदनाओं और आत्मचिंतन के शांत क्षणों का काव्य-संग्रह है। सरल और सहज भाषा में लिखी गई ये कविताएँ प्
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रेम, स्मृतियों, संघर्ष और उम्मीद के विभिन्न रंगों को समेटती हैं। यह पुस्तक पाठक को अपने ही भीतर झाँकने और उन भावनाओं से जुड़ने का अवसर देती है, जिन्हें अक्सर शब्द नहीं मिल पाते। यह प्रथम काव्य-संकलन लेखिका के संवेदनशील दृष्टिकोण और जीवन के प्रति उनके आत्मीय संवाद का परिचय कराता है।
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