Sunita Singh
Description
कालचक्र को चलने दो" समय-चक्र की सतत् प्रवाहित अविरल धारा में मन को सही राह पर साधते हुए काल की गति को स्वीकार करने का आवाहन है। अकस्मात मन को झकझ
...
ोर देने वाली परिस्थितियों से मन को अत्यंत नकारात्मक रूप से प्रभावित होने से बचाने के लिए उन परिस्थितियों को स्वीकार करना आवश्यक होता है जो अपने बस में नहीं होती। जीवन कभी आसान रास्ता नहीं देता। हतोत्साहित करने वाले कारकों और नकारात्मकता के जाल के बीच से जीवन को अंधेरे से उजाले की ओर शांत मन से ले जाने की यात्रा का दर्शन काव्य रूप में प्रस्तुत करती है यह पुस्तक। इसके अतिरिक्त देशभक्ति, संघर्ष, पीड़ा और समाज में व्याप्त समस्याओं को भी ध्यान में रखकर कुछ विषयों पर लिखी रचनाएं भी पुस्तक में संकलित हैं।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Literature & Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Book Rivers
Month-Year
Sep, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789387849228
ISBN-10: 9387849228
Language
Hindi
No. of Pages
120
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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