Rekha Rani
Description
कभी ज़ेहन में ख्याल आता था लिखना बहुत आसान है। बस चाहिये काग़ज़, क़लम, एक दिल, दिमाग़ और कुछ लफ़्ज़, बस लिखने का सिलसिला चल निकलता है। लेकिन जब लेखनी
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हाथों में लिया, तब समझ आया, कल्पना के सहारे ज़िंदगी के सच्चे रंग नहीं उकेरे जा सकते। ऐसे रंग कभी बहुत गहरे, कभी हल्के और कभी बदरंग हो जातें हैं। लिखने के लिये चाहिये जिंदगी के सच्चे सबक, सच्ची घटनायें, अनुभव और इनमें बहते पानी सा प्रवाह लाने के लिए थोड़ी कल्पनाएँ. तब ये शब्दों और लफ़्जों का लिबास पहन कहानियाँ बनतीं हैं. ज़िंदगी की कुछ चुनी घटनाओं को कहानियों में ढालने की यह कोशिश कैसी लगी? पढ़ कर देखिये।
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