Vinita Verma
Description
हम सब जीवन को बहुत बड़ा बोझ समझते हैं — जीवन; अर्थात् हमारा शरीर; हमारा परिवेश; और हमारी कभी न निवित्त होनेवाली समस्याएँ। हम जब भी अपने बारे में सोचते
...
हैं तो हम तो गुम हो ही जाते हैं; साथ ही दूसरे और दूसरों की समस्याएँ भी हमें घेर लेती हैं। दिन-रात इस घिराव में रहकर आखिर में हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि जीवन बहुत पचड़े भरी चीज है। साफ है कि हमें वह जटिल दिखाई देती है और हम कहीं से भी यह प्रकाश नहीं पाते कि वास्तव में जीवन क्या है?
तो सबसे पहली चीज यही है कि हम जीवन का असली अर्थ समझें। असली अर्थ समझेंगे तो जीवन के सहज रूप से भी परिचित होंगे और पाएँगे कि अरे; अब तक तो हमने जीवन का सही मतलब समझा ही नहीं था; और जीवन जीने की कला का जो नैसर्गिक; अर्थात् प्राकृतिक पक्ष है; हम अब उससे परिचित हो रहे हैं। अर्थात् प्रकृति में जो भी चीजें दिखाई देती हैं; वह भी जीवन के बहुरूप हैं और जीवन जीने की सरलता की याद दिलाते रहते हैं। बड़ी बात है कि वे एक-दूसरे से खुद ही मिली हुई हैं। बाहर सुबह की साफ हवा और पक्षियों की अनेक प्रकार की आवाजें हमें अहसास दिलाती हैं
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Genres
Self-Help & Personal Development
Tags
Self-Help
Personal Growth
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789351864707
ISBN-10: 9351864707
Language
Hindi
No. of Pages
152
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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