Sagar Sarhadi
Description
प्रसिद्ध फिल्मकार सागर सरहदी उर्दू में लिखते रहे हैं। इस संकलन में पहली बार उनकी कहानियों का हिन्दी लिप्यन्तरण प्रस्तुत हो रहा है। उनकी कहानियों की दु
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निया कैसे किरदारों से बनी है ? फिल्मी परिवेश के किरदार तो हैं, पर पूरे संकलन में वे मामूली जगह घेरते हैं। बाकी में हैं मुंबई शहर के तलछट, निम्नवर्गीय, निम्नमध्यवर्गीय, शिक्षक, वकील और पंजाब के ग्रामीण। इन कहानियों में एकाकीपन, यथास्थिति के खिलाफ खीज और गुस्सा है। जहाँ वे अपने किरदारों को सहानुभूति देते हैं, वहीं उनके दोमुँहेपन, निष्क्रियता और सहनशीलता को अपने तंजश् का निशाना बनाते हैं। कई कहानियों में ‘मैं’ अपनी कहानी कहता है। लेकिन यह ‘मैं’ अपने को छिपाता या ढँकता नहीं बल्कि अनावृत्त करता है। खुद पर बेरहमी से तंजश् करता है। जहाँ यह ‘मैं’ परोक्ष है, वहाँ भी उसकी उपस्थिति प्रभावशाली है। वे गद्य की भाषा में कविता करने से बाज आते हैं। वे कहानियों में बिम्ब कविता के अंदाज में नहीं लाते बल्कि वे जिश्न्दगी के कतरों से बिम्ब का काम लेते हैं। उनके पास कहानियाँ कहने का फलसफाई अंदाज है जो आज की कहानियों में कम दीखता है। लेकिन यह अंदाज आसमानी फलसफे की तरह हवा में नहीं इतराता, बल्कि वे फीजिक्स से शुरू होकर मेटाफीजिक्स की तरफ बढ़ते हैं। पहले वे अपने घने पर्यवेक्षण से हमें कायल करते हैं फिर उस विवरण को फलसफे की ऊँचाई पर ले जाते हैं। जीव जनावर में अमानवीयता के विरुद्ध सघन चीख है।
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