जगतार सिंह (तारी)
Description
जज़्बात: कब क्या महसूस हो जाये "ज़िंदगी के भागते हुए रास्तों पर कुछ लम्हे ठहर कर खुद को सुनने की कोशिश है—'जज़्बात'। यह महज़ कविताओं का संग्रह नहीं, ब
...
ल्कि उन अनकहे अहसासों का आईना है जो अक्सर शब्दों की तलाश में खो जाते हैं। जब शब्द दिल से निकलकर कागज़ पर उतरते हैं, तो वे 'जज़्बात' बन जाते हैं। आइए, अहसासों के इस सफर में खुद को फिर से तलाशते हैं।"
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