डॉ. रंजना वर्मा
Description
About the book:
इस संग्रह की ग़ज़लों की भाषा हमारी गंगा जमुनी तहज़ीब की नुमाइंदगी करने वाली आम बोलचाल की उर्दू मिश्रित हिंदी ही है । अरबी फारसी शब्दों
...
से बोझिल पांडित्य पूर्ण भाषा के प्रदर्शन से उन्होंने परहेज किया गया है इसलिए ये ग़ज़लें आम पाठक के लिए सहज संप्रेषणीय हैं । हिंदी उर्दू शब्दों का कृत्रिम विभाजन या हिंदी ग़ज़ल या उर्दू ग़ज़ल का वाक्युद्ध इनमें नहीं है । डॉ. रंजना वर्मा स्वप्निल संसार की मुगालते भरी दुनिया में नहीं रहतीं । यथार्थ के कठोर धरातल से उनकी शायरी रूबरू कराती है । इस लिहाज से वे परंपरावादी नहीं पर्याप्त प्रगति शील शायरा हैं । सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्ध हैं तथा पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाती हैं । उन्हें जिंदगी की तल्ख़ियों का एहसास है और गमे-जानाँ ही नहीं गमे-दौराँ भी उनकी शायरी में मौजूद है ।
Read more
Genres
History
Tags
Poetry
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Pencil
Month-Year
Nov, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789355591050
ISBN-10: 9355591055
Language
Hindi
No. of Pages
99
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?