Vijay Tendlukar Translated From Marathi to Hindi Dr. Sunil Devdhar
Description
विजय तेंडुलकर के नाटक सामाजिक जड़ता और विकृतियों पर तीखा प्रहार करते हैं। यह नाटक हमारे समाज में सदियों से चली आ रही जाति व्यवस्था और उसके गहन दुष्प्र
...
भाव पर करारा व्यंय करता है। यह विसंगति आज़ादी के इतने सालों बाद भी हमारे समाज में उपस्थित है। शिक्षा व्यवस्था भी मनुष्यों के मन में विभेद उत्पन्न करने वाली इन बेड़ियों को तोड़ पाने में असफल रही है। यह नाटक हमारी शिक्षा व्यवस्था की उस कमी की ओर भी संकेत करता है जो डिग्रीधारी युवा तो पैदा कर देती है, पर वह समाज की उन्नति के लिए सही अर्थों में अपना कोई रचनात्मक योगदान देने में अक्षम ही साबित होती है। ‘नो वेकेंसी' के इस भयावह समय में शिक्षा व्यवस्था ने बेरोजगार युवाओं की फौज खड़ी कर दी है। यह नाटक उसी प्रश्न से रूबरू कराता है और इस विकट समस्या पर विचार करने को बाध्य करता है।
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Genres
History
Tags
Drama
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Vāṇī Prakāśana
Month-Year
Nov, 2019
ISBN
ISBN-13: 9789387409231
ISBN-10: 9387409236
Language
Hindi
No. of Pages
116
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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