Smt. Ushakiran Khan
Description
कोकाई के संस्कार के बाद बेटों ने जैसा कि अकसर होता है; उधार लेकर भंडारे का आयोजन किया। भंडारा चूँकि साधुओं का था; सो शुद्ध घी का हलुआ-पूड़ी; बुँदिया-द
...
ही का प्रसाद रहा। संस्कार के वक्त ही साधु के प्रतिनिधि ने बड़े बेटे फेंकना से कहा; “तुम कोकाई को अग्नि कैसे दोगे? साँकठ जो हो; पहले कंठी धारण करो; साधु को पैठ होगा वरना...।”
रोता हुआ अबूझ-सा फेंकना कंठी धारण कर बैठ गया। बारहवीं का भोज समाप्त हुआ। गले में गमछा डालकर फेंकना-बुधना साधओं के सामने खड़े हुए।
“साहेब; हम ऋण से उऋण हुए कि नहीं?” कान उऋण सुनने के लिए बेताब थे। साधु घी की खुशबू में सराबोर थे; कीर्तनिया झाल-मृदंग बजाकर गा रहे थे—‘मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तिहारे जाऊँ।’
“नहीं रे फेंकना; तेरी ऋणमुक्ति कहाँ हुई? गोसाईं साहेब ने दो साल पहले पचहत्तर मुंड साधु का भोज-दंड दिया था। नहीं पूरा कर पाया बेचारा। यह तो तुम्हें ही पूरा करना पड़ेगा। उऋण होना है तो यह सब करना पड़ेगा।”
“पचहत्तर मुंड साधु? क्या कहते हैं; हम ऐसे ही लुट गए अब कौन देगा ऋण भी हमको?” रोने लगा फेंकना।
“क्या? तो बाप का पाप कैसे कटित होगा?”
—इसी पुस्तक से
जनम अवधि संग्रह की कहानियाँ भारतीय समाज; शासन-प्रशासन में व्याप्त विसंगतियों; जन-आक्रोश और असंतोष से उपजी हैं। सुधी पाठकों को ये कहानियाँ अपनी लगेंगी और अपने आस-पास ही साकार होती नजर आएँगी। समाज का आईना दिखाती कहानियों का एक पठनीय कहानी-संग्रह।Janam Avadhi by Smt. Ushakiran Khan: "Janam Avadhi" authored by Smt. Ushakiran Khan is likely a book that reflects on the phases and experiences of life.
Key Aspects of the Book "Janam Avadhi":
Lifestages Reflection: The book may reflect on the various stages of life, from birth to old age, and the experiences that accompany them.
Personal Narratives: It might contain personal narratives and stories that relate to the journey of life.
Life's Lessons: "Janam Avadhi" could offer lessons and insights drawn from life's experiences.
Smt. Ushakiran Khan, the author, may be celebrated for her ability to capture the essence of life's journey through her writing.
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