Akash Kumar
Description
"जब काम बोलता है तब नाम बोलता है
हर मेहनत का अंजाम बोलता है
सींचते है जो खून और पसीने से अपने आज को
आने वाला कल,
उनकी सफलता का पैग़ाम बोलता है।
...
जब काम बोलता है तब नाम बोलता है।
जो निगाहों को अपनी एक राह पे जमा के
बेफ़िज़ूल हसरतों को सीने में दफ़ना के
बंदिशों की बेड़ियों को जिद की आग में पिघला के
बेझिझक आगे बढ़ता जाता है,
उसके सुर में एक दिन सारा आवाम बोलता है।
जब काम बोलता है तब नाम बोलता है।
रास्तों की कमी नहीं है दुनियाँ मे
रेतीली राहों से गुज़रने का हुनर होना चाहिए
आराम पसंदी की दुनिया से निकलकर
काटों पे चलने का ज़िगर होना चाहिए
जो जोखिम उठा सकते है जान पे खेलने का
और माद्दा रखते है समय से को पकड़कर
पीछे धकेलने का, एक दिन ऐसे ही लोगों के,
एक-एक पल का दाम बोलता है।
जब काम बोलता है तब नाम बोलता है।"
Read more
Genres
History
Tags
Poetry
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Booksclinic Publishing
Month-Year
May, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789390871681
ISBN-10: 9390871689
Language
Hindi
No. of Pages
99
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?