Vishnu Sharma
Description
<b>सोशल मीडिया का दौर चरम पर है। जो फेसबुक; ट्विटर और ह्वाट्स एप कभी मित्रता और नेटवर्किंग बढ़ाने के साधन समझे जाते थे; वे अब राजनीतिक विचारधारा का टू
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ल बन गए हैं। जिसका सबसे बुरा शिकार हो रहा है इतिहास; जिसकी मर्जी में जो आ रहा है; अपने राजनीतिक फायदे के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर उसे गलत मंशा से सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर शेयर कर रहा है। ऐसे में खासी दिक्कत उस आम आदमी के लिए हो गई है; जिसने यह इतिहास कभी किसी किताब में पढ़ा नहीं; लेकिन प्रतिष्ठित लोग उसे शेयर करें तो उसे सच मान लेता है; वहीं कोई दूसरा प्रतिष्ठित व्यक्ति उसे गलत साबित करता है तो ऐसे में सच क्या है? जरूरी था कि इस दिशा में प्रयास हों और ऐतिहासिक दावों की सच्चाई बताई जा सके। आमतौर पर टीवी के वायरल सच बताने वाले कार्यक्रमों में किसी-न-किसी इतिहासकार के बयान से ही उसे सच या झूठ मान लिया जाता है; जबकि हो सकता है कि वह इतिहासकार खुद किसी विचारधारा का पोषक हो। यह किताब सही संदभों के साथ ऐतिहासिक विवादों की तह में जाकर सच जानने का एक प्रयास है; भले ही छोटा सा है।</b>
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Genres
History
Tags
History
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2019
ISBN
ISBN-13: 9789387980150
ISBN-10: 9387980154
Language
Hindi
No. of Pages
224
Format
Hardcover
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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