Sirshree Tejparkhi
Description
कितनी शुभ है यह इच्छा; ईश्वर से मुलाकात करने की। क्या आपमें भी ऐसी इच्छा जगी है कि किसी दिन आप ईश्वर से मिल पाओ और बातें कर पाओ? यदि हाँ; तो देर किस ब
...
ात की है? देर है आपके अंदर प्रार्थना उठने की।
यह प्रार्थना थी एक बच्चे की; जिसने मंदिर में अपने माता-पिता को ईश्वर की मूरत के आगे सिर झुकाते हुए देखा। बच्चे ने देखा कि कैसे मेरे माता-पिता रोज मंदिर आते हैं...यहाँ से थोड़ा-सा अमृत मिलने पर भी स्वयं को तृप्त महसूस करते हैं...रोज ईश्वर से बातें करते हैं...। तो उसके मन में प्रश्न उठा; ‘हम तो रोज ईश्वर से बात करते हैं। ऐसा दिन कब आएगा; जब ईश्वर भी हमसे बात करेगा; हमसे मुलाकात करेगा?’
उस बच्चे का यह विचार उसकी प्रार्थना बन गया। इस प्रार्थना के बाद उस बच्चे को ईश्वर की सबसे खूबसूरत नियामत मिली—‘भक्ति’; और वह बच्चा कहीं और नहीं; आपके अंदर है।
भक्ति नियामत ईश्वर से मिलने का सबसे सहज व सरल मार्ग है। तो आइए; इस पुस्तक के जरिए भक्ति की इस खूबसूरत नियामत को समझें और कहें; ‘तुम्हें जो लगे अच्छा; वही मेरी इच्छा।’
Read more
Genres
Biography & Memoir
Tags
Religious
Biography & Autobiography
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789352662821
ISBN-10: 9352662822
Language
Hindi
No. of Pages
176
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?