Rajgopal Singh
Description
""इस पुस्तक इतिहास के पन्नों से झाँकती कुछ प्रेम कहानियों के होने की आश्वस्ति है, एक ईमानदार स्वीकारोक्ति भी कि जहाँ तक बन पड़ा है, इनमें इतिहास के तथ्
...
यों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। सचमुच लेखक की आश्वस्ति के साथ जब हम ये सत्य कथाएँ पढ़ते हैं तो प्रारंभ में बेशक उर्दू दां भाषा शिल्प की बहुलता हमें चौंकाती है, लेकिन बहुत जल्दी हम उसे भूल इन प्रेम कथाओं के संजीदा और कशिश भरे प्रसंगों में डूबते चले जाते हैं।"" लेखक की कहानियों में जिस तरह की भाषा-शिल्प का उपयोग किया गया है वह प्रेम और रूमानियत के उजले पक्ष की ओर संकेत करता दिखता है। कई स्थलों पर लेखक ने नकारात्मकता के माहौल में सकारात्मकता के भाव ढूंढ कर उन्हें रेखांकित करने और पाठकों का ध्यान आकर्षित करने में सफलता पाई है। शायद एक समय ऐसा आए कि हम उनकी कहानियों से इतिहास को और भी अच्छे ढंग से समझ सकें। इतिहास जैसे शुष्क संदर्भों में प्रेम को खोज कर उसे स्नेह के भावों से उकेरना लेखक के शिल्पबोध की गहनता और दृष्टि को दिखलाता है।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Jvp Publication pvt. Limited
Month-Year
Feb, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789390500109
ISBN-10: 9390500109
Language
Hindi
No. of Pages
126
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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