कुलदीप यादव
Description
"आज मुझे गहरी नींद आई क्यूँ, तू मेरे ख्वाब में नहीं आई क्यूँ?" कलम की आवाज़: कुलदीप यादव जब जज़्बात शब्दों की शक्ल ले लेते हैं, तो वह महज़ कविता नहीं र
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हती, दिल की धड़कन बन जाती है। महज़ 18 वर्ष की आयु में कुलदीप यादव ने अपनी शायरी और कविताओं के ज़रिए उन अनकहे अहसासों को पिरोया है, जिन्हें हम अक्सर बयां नहीं कर पाते। इस संग्रह में जवानी की दहलीज पर खड़े एक युवा का नज़रिया है—वही मासूमियत, वही इंतज़ार और वही गहरी खामोशी, जो आपके शेर में झलकती है। यह किताब उन सभी के लिए है जो मोहब्बत, यादों और ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव को अपनी रूह से महसूस करते हैं। कुलदीप की यह पहली साहित्यिक कृति पाठकों को एक ऐसे सफर पर ले जाएगी जहाँ हर पन्ना एक नया अहसास जगाता है। लेखक के बारे में: कुलदीप यादव एक उभरते हुए युवा कवि और शायर हैं। 18 साल की उम्र में अपनी पहली किताब के साथ वे साहित्य की दुनिया में अपना कदम रख रहे हैं। उनकी लेखनी सरल, सहज और सीधे दिल पर दस्तक देने वा ली है।
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