Muhammad Iqbal
Description
मशहूर शायर 'मनुव्वर राना' का कहना है कि इक़बाल के जेहन में हमेशा वह हिन्दुस्तान था, जो किसी सरहद में नहीं बँटा था। सर मुहम्मद इक़बाल अविभाजित भारत के
...
प्रसिद्ध कवि, नेता और दार्शनिक थे। उर्दू और फ़ारसी में इनकी शायरी को आधुनिक काल की सर्वश्रेष्ठ शायरी में गिना जाता है। इक़बाल को ग़ज़लों की तरह नज़्में लिखने में बड़ी महारत हासिल थी। उनकी दर्दभरी नज़्में सुनकर लोग रोने लगतेतेरे इश्क़ की इन्तिहा चाहता हूंमिरी सादगी देख क्या चाहता हूं
सितम हो कि हो वादा-ए-बे-हिजाबी
कोई बात सब्र-आज़मा चाहता हूँ
ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों को
कि मैं आप का सामना चाहता हूँ
ज़रा सा तो दिल हूँ मगर शोख़ इतना
वही लन-तरानी सुना चाहता हूँ
कोई दम का मेहमाँ हूँ ऐ अहल-ए-महफ़िल
चराग़-ए-सहर हूँ बुझा चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ सज़ा चाहता हूँ
थे।
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Genres
History
Tags
Asian
Poetry
Reading Moods
Romantic & Emotional
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Manjul Publishing
Month-Year
Oct, 2019
ISBN
ISBN-13: 9789389143560
ISBN-10: 938914356X
Language
Hindi
No. of Pages
122
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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