Virendra Kumar Gupta
Description
श्रीमदभगवद्गीता हमारी संस्कृति का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है। गीता के उपदेश प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक और आने वाले भविष्य काल में हमारे जीवन पर प्र
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भाव डालते आ रहे हैं और डालते रहेंगे। लेखक ने इस पुस्तिका में गीता के उपदेशों को आजकल के व्यस्त जीवन को ध्यान में रखते हुए जन मानस की सरल भाषा में समझाया है। गीता में उपयोग किए गए शब्दों जैसे कर्म, कामना, वासना, आसक्ति, मन, फल, परिणाम, मनोदशा इत्यादि की व्याख्या जीवन की साधारण घटनाओं के उदाहरणों के साथ की गयी है। पुस्तिका को संक्षिप्त रखते हुए, कर्मयोग एवं मनोदशा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को ही लिया गया है। ये सभी अन्य योगों के लिए भी आवश्यक हैं। पहले शरीर, कर्म और मन के बारे में मौलिक जानकारी दी गयी है ताकि ये विषय आसानी से समझ आ सकें। यह जानकारी आसानी से कहीं भी उपलब्ध नहीं है। हमें पूरा विश्वास है कि सभी आयु और वर्गों के व्यक्ति गीता अमृत की इस सरल व्याख्या से लाभ उठा कर अपने जीवन को और बेहतर कर पाएंगे। व्यक्तिगत जीवन की बेहतरी ही पारिवारिक व सामाजिक बेहतरी का मार्ग प्रशस्त करती है।
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