Sharankumar Limbale
Description
अयोध्या में राम मन्दिर बनाने के प्रश्न पर हिन्दू संगठनों ने जमीन-आसमान एक किया और कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद ध्वस्त कर दी। इस घटना के बाद देश का सामाज
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िक वातावरण बदलने लगा। मुम्बई में हुए दंगे, बम-विस्फोट, कश्मीर में चल रही आतंकवादी कार्रवाइयाँ, संसद पर हुआ आक्रमण आदि से देश की शान्ति खतरे में पड़ गयी। राजनीतिक दहशतगर्दों ने इस देश के सौहार्द को खून में डुबो दिया। इस दहशतगर्दी के विरोध में चर्चाएँ शुरू हुयी। राजनीतिक दहशतगर्दी ने पूरे विश्व को ही अपने घेरे में ले लिया। हिन्दू समाज का विषम ताना-बाना और विकृत जाति व्यवस्था-इन दोनों का पोस्टमार्टम करने हेतु ही यह ‘हिन्दू’ उपन्यास लिखा गया है। इस देश पर जाति व्यवस्था का जो कलंक है, उसे मिटाए बगैर यह देश सुन्दर नहीं हो सकेगा। जाति व्यवस्था के खिलाफ बोलने का अर्थ है राष्ट्रीय एकता की, सौन्दर्य की भाषा बोलना।
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