Kamta Prasad Guru
Description
हिंदी तथा अन्यान्य भाषाओं के व्याकरणों से उचित सहायता लेने पर भी इस पुस्तक में जो विचार प्रकट किए गए हैं और जो सिद्धांत निश्चित किए गए हैं; वे साहित्य
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िक हिंदी से ही संबंध रखते हैं। यहाँ यह कह देना अनुचित न होगा कि हिंदी व्याकरण की छोटी-मोटी कई पुस्तकें उपलब्ध होते हुए भी हिंदी में; इस समय अपने विषय और ढंग की यही एक व्यापक और संभवतः मौलिक पुस्तक है। इसमें प्रसिद्ध वैयाकरण श्री कामताप्रसाद गुरु का कई गं्रथों का अध्ययन और कई वर्षों का परिश्रम तथा विषय का अनुराग एवं स्वार्थत्याग सम्मिलित है। इस व्याकरण में अन्यान्य विशेषताओं के साथ-साथ एक बड़ी विशेषता यह भी है कि नियमों के स्पष्टीकरण के लिए इसमें जो उदाहरण दिए गए हैं; वे अधिकतर हिंदी के भिन्न-भिन्न कालों के प्रतिष्ठित और प्रामाणिक लेखकों के ग्रंथों से लिये गए हैं। इस विशेषता के कारण पुस्तक में यथासंभव अंधपरंपरा अथवा कृत्रिमता का दोष नहीं आने पाया है।
अपने गुण-वैशिष्ट्य और प्रस्तुति के कारण हिंदी व्याकरण पर अब तक की सबसे प्रामाणिक और व्यावहारिक पुस्तक।
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Genres
No genres specified
Tags
Language Arts & Disciplines
Linguistics
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jul, 2018
ISBN
ISBN-13: 9789386871596
ISBN-10: 9386871599
Language
Hindi
No. of Pages
496
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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