Chaturbhuj Sahay
Description
भावों और विचारों की अभिव्यक्ति में सामान्य रूप से एकाधिक वाक्यों की सहायता ली जाती है। कभी-कभी एक वाक्य में संपुटित भाव या विचार का ही पल्लवन आगे के व
...
ाक्यों में किया जाता है। पाठ का स्वरूप जो भी हो, पाठ में प्रयुक्त वाक्य परस्पर जुड़े होते हैं। भले प्रकट रूप में संयोजकों का प्रयोग पाठ में न हुआ हो तो भी केवल अर्थबल से ही वाक्यों के परस्पर सम्बन्ध प्रतीत होते हैं। संयोजक इन संबंधों को केवल योतित करते हैं। ये कोई नया संबंध या अर्थ पैदा नहीं करते। संयोजकों पर विचार करते समय तर्कशास्त्र के वाक्य कलन की अवधारणाओं का भी उपयोग किया गया है। समानाधिकरण तथा व्यधिकरण संबंधों की अस्थिरता की ओर संकेत किया गया है। इसके साथ संयोजकों के परस्पर साम्य एवं वैषम्य पर भी विचार किया गया है।
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Genres
No genres specified
Tags
Arborist Merchandising Root
Self Service
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Vāṇī Prakāśana
Month-Year
Nov, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789389915143
ISBN-10: 9389915147
Language
Hindi
No. of Pages
368
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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