Hazariprasad Dwivedi
Description
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने साहित्यिक इतिहास-लेखन को पहली बार 'पूर्ववर्ती व्यक्तिवादी इतिहास-प्रणाली के स्थान पर सामाजिक अथवा जातीय एतिहासिक प्रणाल
...
ी' का दृढ वैज्ञानिक आधार प्रदान किया ! उनका प्रस्तुत ग्रन्थ इसी दृष्टि से हिंदी का अत्यधिक महत्तपूर्ण साहित्येतिहास है ! यह कृति मूलतः विद्यार्थियों को दृष्टि में रखकर लिखी गई है ! प्रयत्न किया गया है कि यथासंभव सुबोध भाषा में साहित्य की विभिन्न प्रवृत्तियों और उसके महत्तपूर्ण बाह्य रूपों के मूल और वास्तविक स्वरुप का स्पष्ट परिचय दे दिया जाए ! परन्तु पुस्तक के संशिप्त कलेवर के समय ध्यान रखा गया है कि मुख्य प्रवृतियों का विवेचन छूटने न पाए और विद्यार्थी अद्यावधिक शोध-कार्यों के परिणाम से अपरिचित न रह जाएँ ! उन अनावश्यक अटकलबाजियो और अप्रासंगिक विवेचनाओं को समझाने का प्रयत्न तो किया गया है, पर बहुत अधिक नाम गिनाने की मनोवृत्ति से बचने का भी प्रयास है ! इससे बहुत से लेखको के नाम छूट गए हैं, पर साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियां नहीं छूटी हैं ! साहित्य के विद्यार्थियों और जिज्ञासुओं के लिए एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक !
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Genres
No genres specified
Tags
Literary Criticism
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Sep, 2009
ISBN
ISBN-13: 9788126700356
ISBN-10: 8126700351
Language
Hindi
No. of Pages
267
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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