Badrinath Kapoor
Description
भाषा शब्दों से बनती है । शब्दों के बारे में जानकारी व्याकरण देता है और उनके अर्थों का विवरण कोश प्रस्तुत करता है । इस प्रकार भाषा को जानने-समझने के लि
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ए व्याकरण और कोश दो आधार माने जाते हैं । लेकिन भाषा का एक तीसरा महत्त्वपूर्ण आधार भी है- प्रयोग । भाषा के स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया में नये-नये संदर्भों के अनुरूप नये-नये प्रयोग चलते रहते हैं । प्रयोगों से भाषा की प्रभावकता और क्षमता में वृद्धि होती है । इनकी महत्ता इस तथ्य में निहित है कि बहु धा ये व्याकरण और कोश को पीछे छोडू जाते हैं । प्रयोगों के फलस्वरूप ही नये-नये पदबंध और मुहावरे अस्तित्व में आते हैं । लेखक की लेखनी और वक्ता की वाणी को उनसे ऊर्जा मिलती है । उनके अर्थ अक्सर आप सामान्य कोशों में ढूँढ नहीं पाते, व्याकरण से वे सिद्ध नहीं होते, फिर भी वे मान्य और अपरिहार्य होते हैं । एक प्रामाणिक प्रयोग-कोश की अनिवार्यता ऐसी ही स्थिति में सामने आती है । वाक्य में कोई शब्द जिस जगह या जिन शब्दों के मध्य रखा जाता है उससे कोई न कोई प्रयोजन सिद्ध होता है । किसी न किसी प्रकार की प्रयोजन-सिद्धि के लिए ही शब्दों का प्रयोग किया जाता है । यदि कोई शब्द अपने अर्थ-गांभीर्य या अर्थ-विस्तार से हमें प्रभावित करता है तो अपने विलक्षण प्रयोगों से अभिभूत और चमत्कृत भी करता है । शब्दों से अंतरंगता उनके प्रयोगों के माध्यम से ही स्थापित होती हैं । हिंदी अपनी शब्दों के प्रयोग के विचार से कितनी अधिक समृद्ध है यह तथ्य इस कोश की हर प्रविष्टि से चरितार्थ होता है ।
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Genres
No genres specified
Tags
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Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Lokbharti Prakashan
Month-Year
Sep, 2006
ISBN
ISBN-13: 9788180310102
ISBN-10: 8180310108
Language
Hindi
No. of Pages
320
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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