Sri Hari
Description
अंजना और केसरी दंपतियों को वायुदेव का वरदान से जनित पुत्र थे हनुमान। वह रुद्रांश संभूत थे। एक बार सुर्यग्रहण काल में सूर्योदय के समय सूर्य को एक फल सम
...
झकर उसे खाने की अपेक्षा से हनुमान ने अंतरिक्ष तक छलांग लगाई। उसी समय राहु भी सूर्य को निगलने आगे बढ़रहा था। तब हनुमान सूर्य को छोड़कर राहु की ओर बढ़ने लगा, देवेन्द्र ने अपनी वज्रायुध से हनुमान पर प्रहार किया। इससे हनुमान बेहोशहोकर धरतीपर गिरगया। अपने पुत्र की ऐसी स्थिति देखकर वायुदेव कुपित होकर पुत्र को लेकर एक गुफा में छिपगया। उसके पश्चात् सभी देवताएँ वहाँ पहुँचकर हनुमान के कई वरदान देकर वायुदेव को शांत किया। रामदूत, सात चिरंजीवियों में से एक हनुमान की चरित्र रामायण में विस्तार रूप से लिखागया है। राम-सुग्रीव का स्नेह, सीतान्वेषण करने समुद्रलंघन, लंका दहन, सेतुबंधन राक्षस संहार, इन्द्रजीत संहार करने में लक्ष्मण को सहायता करना आदी.... बुद्धिमान् एक श्रेष्ठ बलवान्, ब्रह्मचारी हनुमान की चरित्र सब को पढ़ना और जानना अति आवश्यक हैं।
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Reading Moods
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Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Bharatha Samskruthi Prakashana
Month-Year
Mar, 2019
ISBN
ISBN-13: 9789389020809
ISBN-10: 9389020808
Language
Hindi
No. of Pages
48
Format
Paperback
Awards & Recognition
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