Shipra Mishra , Manoj Srivastava
Description
अथॉरिटी में एंगर नहीं है। हमें अपना रोल; अपनी रिस्पोंसिबिलिटी निभानी है; लेकिन सभी कार्य बिना डिस्टर्ब होकर करने हैं।
हम अथॉरिटी का प्रयोग करें; लेकिन
...
गुस्सा नहीं करें। गुस्से में हम अंदर से डिस्टर्ब होकर अपने ऊपर कंट्रोल खो देते हैं। हम ऊपर से नीचे तक पूरी तरह हिल जाते हैं; लेकिन अथॉरिटी में हम पूरी तरह शांत व स्थिर रहकर कार्य करते हैं। अथॉरिटी में रहकर हम एक-एक शब्द सोच-समझकर बोलते जाते हैं। हम सकारात्मक रहते हैं।
सामान्य जीवन में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो; जिसे क्रोध न आता हो; लेकिन एक सीमा के बाद क्रोध हमारे जीवन को डिस्टर्ब करने लगता है। हमें इस सीमा की पहचान करनी आवश्यक है। हम क्रोध को नेचुरल कहकर अपने क्रोध का बचाव नहीं कर सकते हैं। हमें क्रोधित होने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेनी होगी। जिम्मेदारी लेने से हम मजबूत बनते हैं और बहाना बनाने से हम कमजोर हो जाते हैं। यदि हम अपने क्रोध की जिम्मेदारी लेते हैं; तब हमें क्रोध-मुक्ति का रास्ता भी मिलेगा।
यदि पुस्तक में दिए गए उपायों का पालन किया जाए; तो हमें क्रोध से शत-प्रतिशत मुक्ति मिल सकती है; परंतु यदि पुस्तक में दिए गए थोड़े भी उपाय का पालन किया जाए; तो हमारा गुस्सा न्यूनतम स्तर पर अवश्य आ जाएगा।
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Genres
Self-Help & Personal Development
Tags
Self-Help
Personal Growth
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9788177214208
ISBN-10: 8177214209
Language
Hindi
No. of Pages
168
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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