Minakshi Jain
Description
भगवद्गीता से रहस्यमय पुस्तक मैंने आज तक नहीं पढ़ी। मानव जीवन के कितने गूढ़ रहस्य छिपे हैं इसमें। कुछ बाहर से दिखते हैं और बाकी शांत इस बड़े संसार रूपी
...
रहस्यमय वातावरण में असंख्य वायु कणों की भाँति अलोप हैं। गीता पढ़ कर आभास हुआ कि कितना जीवन तो व्यर्थ हो गया। इसका सार समझना केवल कठिन ही नहीं कठिनतम है परंतु उसे आत्मसात करना लगभग असंभव। पर वह मानव ही क्या जो असंभव को सम्भव ना करे। जब मैंने गीता पढ़ी तब लगा कि भाषा को समझने में सुगमता ना होने के कारण लोग गीता पढ़ तो पाते हैं पर समझ नहीं पाते। कदाचित यह भी उस परम्ब्रह्म परमात्मा की कृपा दृष्टि व आदेश था कि मैं गीता का संदेश उन लोगों तक पहुँचाऊँ। मैंने इसका सरलीकरण करने का प्रयास किया है और यह भी प्रयास किया है कि इसे काव्य बद्ध कर पाऊँ जिसì
Read more
Genres
Religion & Spirituality
Tags
Religion
Spirituality
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Repro India Limited
Month-Year
Jun, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789390960156
ISBN-10: 9390960150
Language
Hindi
No. of Pages
314
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?