Suvas Kumar
Description
परसाई, श्रीलाल शुक्ल, ज्ञानरंजन, गोविंद मिश्र आदि के कथा स्वभाव को समझने और उसका मूल्यांकन करने में प्रगट होती है। ‘‘यह सच है कि प्रेमचंद हिन्दी कथा स
...
ाहित्य के उदय-शिखर हैं, लेकिन उनके बाद भी आलोक प्रखरतर हुआ, इसमें संदेह नहीं।“ - जैसा वाक्या लिखने के लिए जिस ईमानदार साहस की जरूरत है, वह सुवास कुमार के इन पारदर्शी लेखों में सहज ही जगह-जगह दिखाई देता है। इसी साहस के बल पर वे कूड़े को कूड़ा कहने से भी नहीं हिचकते, इसके बावजूद कि हर नए-पुराने लेखक को उनकी पर्याप्त सहानुभूति मिली है।
Read more