Dr Moni Mathur
Description
कुछ रिश्ते चन्दन जैसे होते हैं, डिब्बे में पड़े सूख जाते हैं, लेकिन अपनेपन के ज़रा से जल से घिसने पर महक उठते हैं| इतने वर्ष बाद रूचि का मासूम चेहरा साम
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ने देख विनीता को ऐसा ही लगा, उसकी बहन अभी जीवित हैं| प्रतिशोध भरा पाषाण हृदयी नारी मन, अपने ह्रदय की वेदना पराजित कर, “कर्त्तव्य बोध” का पलड़ा भारी कर आप्लावित हो उठा| अपने कर्तव्य का निर्वहन करती है “संयोजन सम्राट” की नायिका, ज्योति जब उसके पति कहते हैं “तुम्हारे न कहने से इस बात से मैं ज्यादा खुश हूँ की तुमने मेरा मन पढ़ लिया “|
१६ कहानियों के संग्रह में स्त्री विमर्श की संतुलित कहानियां आस पास की महिलाओं के जीवन को आधार बनाती हैं | उत्पन्न स्तिथि को सम्हालने में उसके स्वयं के भरसक प्रयास में एक सशक्त महिला के उभर आने की कहानी कहती हैं “गुलाबी दुपट्टे की आभा”| यद्यपि महिला समझती है वह कहाँ ठगी जा रही है, कहाँ उसपर अन्याय हो रहा है, कहानियां कहीं भी पुरुष को कटघरे में नहीं खड़ा करतीं| सामाजिक, भौतिक, व्यवहारिक विषयों पर सहज, भावपूर्ण, निरंतर प्रवाह में बढती हैं कहानियां| कहानियां बहुत बड़ी नहीं हैं, इसलिए उबाऊ नहीं हैं, सबके विषय अलग हैं, रोचक हैं | दहेज़ प्रथा पर प्रहार करती, प्रगतिशील परिवार में कन्या भ्रूण हत्या की विडंबना को उजागर करती, अपने निर्णय लेती इक्कीसवी सदी की आत्मविश्वासी महिला, संस्कारित नारी की चिंता, कहानिया सबसे परिचित कराती हैं | टीनअजेर्स से वयो-वृद्ध पाठक के लिए एक के बाद एक पठनीय कथानक में हिंसा और तनाव का स्थान नहीं है|
साफ़ सुथरी, नाटकीयता से परे, सामाजिक जागरूकता लाने के लिए पुस्तक को अपने समय की संदेशवाहक, प्रभावशील कहानी संग्रह कहा जा सकता है| इस पुस्तक में अनेक कहानी के कथानक आपके आस पास घटते नज़र आयेंगे, आज भी और आगे भी..
Author
कहानी संग्रह “गुलाबी दुपट्टे की आभा” पुस्तक की लेखिका डॉ श्रीमती मोनी माथुर वनस्पति शास्त्र की वरिष्ठ प्राध्यापिका रहीं| इन्होने पीएच.डी. सागर वि वि सागर, एम.एससी. वनस्पति शास्त्र, मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल, और सीनियर कैंब्रिज झाँसी से किया है|
म.प्र. लोक सेवा आयोग से 1977 में चयनित होकर मध्य प्रदेश के महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष के रूप में अध्यापन और शोध में सतत संलग्न रहीं| उप सचिव, म.प्र.शासन उच्च शिक्षा, तथा सलाहकार जैवप्रौद्योगिकी परिषद् म.प्र. में पदस्थ होने से प्रशासनिक अनुभव हासिल किया| “हू इज़ हू इन म.प्र.” तथा “लीडिंग लेडीज ऑफ़ म.प्र. एंड छत्तीसगढ़” पुस्तकों में नाम प्रकाशित है| वर्तमान में हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में कहानी लेखन, पत्रिकाओं, आकाशवाणी में प्रकाशन एवं प्रसारण|
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