डॉ . महेश कुमार व्हाईट
Description
कहते हैं "जिसके पास जितने जख्म वो उतना बड़ा लेखक" जिनमे से कुछ मोहब्बत के जख्मों से झुलसे होते हैं और कुछ ज़िंदगी के, मोहब्बत के जख्मों अस्थायी भी हो स
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कते हैं उनसे उबरने की उम्मीद बरकरार फिर भी रहती है, ये किसी ना किसी मरहम से ठीक हो सकते हैं, मगर ज़िंदगी के जख्मों की कुलमुलाहट ज़िंदगी भर रहती है ये जिंदगी भर नही भरते, इन्हें जितना भी भरने की कोशिश करो उतनी ही दफा और सेहतयाब हो जाते हैं।
तो सबसे अच्छा लेखक वो जिसने ज़िंदगी को खुद लिखा हो।
"हम तजुर्बा तुमसे एक उम्र ज्यादा रखते हैं।
तुम ज़िंदगी जीते हो, हम ज़िंदगी लिखते हैं।।"
बचपन मे जब मोहल्ले में गुब्बारे वाला आता तो हम अपनी माँ की अँगुली तक को छुड़ा कर दौड़ पड़ते हैं,
जैसे वो गुब्बारे वाला उन रंगीन गुब्बारों में हवा के साथ साथ हमारी ज़िंदगी ले आया हो।
और अपनी उस हल्की फुल्की ज़िंदगी को हवा में लहराते हुए मोहल्ले भर में दौड़ जाते हैं, सच बताऊं तो ऐसी ज़िंदगी, ज़िंदगी भर नसीब नही होती।
"चल माँ हल्की सी ज़िंदगी खरीद लेते हैं।
आज मोहल्ले में गुब्बारे वाला आया है।।"
कुछ ऐसी ही किताब है "गुब्बारे" जिसमे रंग बिरंगी कहानियों के साथ साथ जज्बात भी लबालब भरे हैं।
मैं वो ज़िंदगी तो नही लौटा सकता लेकिन ज़िंदगी से आपको रूबरू कराने की बहुत ज्यादा कोशिश की है।
वैसे तो इसको पूरा करने में मेरे यार दोस्त मेरे चाहने वालों की सुभकामनाएँ ही मेरी प्रेरणा बनी, पर अपनी ज़िंदगी के उन दिनों का भी शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने अपनी कुछ सुबहों को मुझे नज्र किया, और मैं अपनी ज़िंदगी की उन रातों का भी शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने मुझे अपनी कई खूबसूरत शामों को मुझे नसीब किया है। मेरी कई सुबहो ने, कई शामों ने इस कहानी से भरे रंग बिरंगे गुच्छे को पूरा करने में मेरा भरपूर साथ दिया है, मै इनका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
इसमें लगभग 23 रंग बिरंगी कहानियों के गुब्बारे हैं,
जिसमे ज़िंदगी के हर पल को समेट कर हवा के रूप में भरा गया है, इसको पढ़कर शायद ज़िंदगी के कुछ बोझ से आप अपने आप को बहुत हल्का महसूस करेंगे।
इन गुब्बारे रूपी कहानियों का गुच्छा बनाने में सभी मेरे साथियों, प्यारे दोस्तों, मेरे पाठकों का तहेदिल से शुक्रिया।
हमारे पब्लिकेशन का भी दिल से आभार जिन्होंने इस कहानियों से लबरेज "गुब्बारे" को सभी पाठकों तक एवं एक मुक्कमल मुकाम तक पहुँचाया है।
और सबसे ज्यादा उन बेहतरीन पलों का शुक्रिया जिन पलो ने मुझे इन रंगीन "गुब्बारे" को गढ़ने का मौका दिया है।
- डॉ . महेश कुमार ‘व्हाइट’
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