राम शरण सेठ
Description
बच्चों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर लिखा गया साहित्य बाल साहित्य कहलाता है जिसके अंतर्गत रोचक एवम शिक्षा प्रदान करने वाली छोटी छोटी बाल कथाएँ, कहा
...
नियाँ,बाल गीत व कविताएँ आती हैं।
आदरणीय रामशरण सेठ जी ने भी इन्हीं सब बातों को जहन में रख अपने मन के भावों को बाल रंग में सराबोर कर बेहद सौम्य,सरल एवम सुंदर तरीके से पन्नों पर उकेरा है। उन्होंने अपनी छोटी छोटी कविताओं में पशु,पक्षी,दादी,नानी, गुब्बारे और प्रकृति की अनगिन चीजों के माध्यम से न केवल नन्हें बाल मन को छूने का प्रयास किया है अपितु,बच्चों का मनोरंजन करने की दृष्टि से विविध प्रकार की ध्वनियों को चित्रित करने की भी सफल कोशिश की है।
कहीं रेलगाड़ी की छुक छुक तो कहीं हाथी की चिंघाड़,कहीं चिड़िया की चूं चूं तो कहीं भालू खूंखार, ऐसे ही अनेक लुभावने तरीकों का पुट दे कविताओं को जीवंत रखने का सेठ जी ने भरपूर प्रयत्न किया है।
कविताओं में नानी,मामी,दादी, मामा,मौसी,मौसा आदि की मौजूदगी बाल मन पर रिश्तों की अमिट छाप छोड़ेगी जिससे उनके सामाजिक एवम मानसिक विकास को भी अवश्य ही एक नई दिशा मिलेगी।
जहां एक ओर गुब्बारे के माध्यम से बाल मन की कल्पना शक्ति में उड़ान भरने की कोशिश की है,वहीं दूसरी ओर परम आदरणीय श्री राम रामशरण सेठ जी ने अपने संग्रह में मेले का जिक्र कर बच्चों को उनकी संस्कृति से जोड़ने का अथक प्रयास भी किया है जो कि अति प्रशंसनीय है।
आम,जामुन,अंगूर और अनार इन कविताओं का उद्देश्य मात्र मनोरंजन ही नहीं बल्कि बच्चों के जीवन में फलों सी मिठास घोलना भी है जिससे भविष्य में एक सभ्य,शांत एवम सुंदर समाज का निर्माण किया जा सके।
- पिंकी सिंघल
सहायक संपादिका, इंकलाब पत्रिका।
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