Meena Arora
Description
यह उपन्यास उन अहेरी पुरुषों पर आधारित है, जिनकी दुर्बल मानसिकता की वजह से कुछ बच्चियाँ समाज में उपेक्षित जीवन या कह सकते हैं कि नारकीय जीवन जीने पर वि
...
वश होती हैं। इस उपन्यास की नायिका की किस्मत में ईश्वरीय प्रदत्त दोष है, उसकी सुंदरता और दूसरा सबसे बड़ा दोष गरीब परिवार में जन्म लेना। नायिका के आसपास चलता घटनाओं का कुचक्र सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वह अकेली ऐसी लड़की है, जो बार-बार दुष्ट पुरुषों की विकलांग मानसिकता का शिकार हो रही है। उपन्यास पूर्णरूपेण काल्पनिक नहीं है। उपन्यास की सभ्य, सम्मानित और भोली-भाली नायिकाओं से जब लेखिका का परिचय हुआ तो वह उनसे प्रभावित हुए बिना न रह सकी। लेकिन जब उन्होंने अपने बीते हुए कल से लेखिका को अवगत कराया तो वह उनके द्वारा बचपन से झेले गए अनेक कष्टों को सुनकर सन्न रह गई। समाज इन पीडि़तों को उनका खोया कुछ नहीं लौटा सकता, परंतु इस उपन्यास के माध्यम से लेखिका यह संदेश देना चाहती है कि जो घृणित कार्य मानसिक रूप से विकलांग पुरुषों द्वारा किए जाते हैं, उस पापकर्म को भोगनेवाली बच्चियों को किसी प्रकार से समाज में उपेक्षित नजरों से न देखकर उनका सम्मान करना चाहिए। साथ ही दोषी पुरुषों को कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए, जिससे समाज में विचरनेवाले आखेटक प्रवृत्ति के पुरुष सावधान हो जाएँ और इस तरह के दुष्कर्मों को त्याग दें। नारी के सम्मान और उसकी अस्मिता का पुनर्स्थापन करनेवाला पठनीय उपन्यास।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
PRABHAT PRAKASHAN PVT Limited
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789384343729
ISBN-10: 9384343722
Language
Hindi
No. of Pages
154
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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