Chitra Mudgal
Description
विज्ञापन की चकाचौंध दुनिया में जितना हिस्सा पूँजी का है, शायद उससे कम हिस्सेदारी स्त्राी की नहीं है। इस नए सत्ता-प्रतिष्ठान में स्त्राी अपनी देह और प्
...
रकृति के माध्यम से बाजार के सन्देश को ही उपभोक्ता तक नहीं पहुँचाती, बल्कि इस उद्योग मे पर्दे के पीछे एक बड़ी ‘वर्क फोर्स’ भी स्त्रिायों से ही बनती है। ‘एक ज़मीन अपनी’ विज्ञापन की उस दुनिया की कहानी भी है जहाँ समाज की इच्छाओं को पैना करने के औजार तैयार किए जाते हैं और स्त्राी के उस संघर्ष की भी जो वह इस दुनिया में अपनी रचनात्मक क्षमता की पहचान अर्जित करने और सिर्फ देह-भर न रहने के लिए करती है। आठवें दशक की बहुचर्चित कथाकार चित्रा मुद्गल ने इस उपन्यास में उसके इस संघर्ष को निष्पक्षता के साथ उकेरते हुए इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है कि वे सवाल भी अछूते न रह जाएँ जो विज्ञापन-जगत की अपेक्षाकृत नई संघर्ष-भूमि में नारी-स्वातंत्रय को लेकर उठते हैं, उठ सकते हैं।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Sep, 2001
ISBN
ISBN-13: 9788126703012
ISBN-10: 8126703016
Language
Hindi
No. of Pages
206
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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