Mrinal Pandey
Description
हमारे समय में, जब अखबारी खबर को 'स्टोरी', और रोमांच और सनसनी-भरी वारदातों को 'सत्यकथा' या 'नाटक' कहकर परिभाषित किया जाने लगा है, तो एक इमानदार कहानीका
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र के लिए जरूरी हो जाता है, कि वह नए सिरे से वह लिखे, जो सत्यकथा नहीं, स्टोरी नहीं, राष्ट्र के नाम सन्देश य रिपोर्ताज भी नहीं, सिर्फ एक विशुद्धि गाठी हुई कहानी हो, और कहानी के सिवा कुछ न हो! इस संकलन की कहानियां हमारे समय, और खुद कलाकार की, रचनात्मक शक्ति को आखिरी बूँद तक निथारकर, उससे वह अंतिम आकर छान पाने की कोशिश करती हैं, जो प्रचार-माध्यमों की पकड़ के परे, कहानी-कला का विशुद्ध स्वरुप है! इनमें एकल किस्सागोई भी है, और सामूहिक हुंकारा भी! सुनी-सुनाई भी है, और देखि-दिखाई भी, जन्म भी है, और मृत्यु भी, चलायमान समय भी है, और सर्वव्यापी काल भी! और अगर कोई सुधिजन कुनमुना-हिनहिनाकर पूछें, कि इनमें आदि-मध्य-अंत (और समाज के लिए सन्देश य सुक्तिवचन सामान कुछ बातें) क्यों नहीं हैं? तो यह कहानियां बड़ी विनर्मता से पूछना चाहेंती, जीवन में ही वह सब है क्या?
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