Vikram Seth
Description
विक्रम सेठ अपनी अनूठी शैली के लेखक हैं। उनकी किसी भी पुस्तक में किसी किस्म का दोहराव नहीं होता, फिर भी उनकी प्रत्येक कृति पर उनकी अपनी पहचान अंकित होत
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ी है। कुछ आलोचक इस पहचान को ‘जीवन की अचूक साँस’ तो कुछ उसे ‘अनुल्लंघनीय सच्चाई’ कहते हैं। ‘ए सूटेबुल ब्याय’ के बाद उनका यह पहला उपन्यास हे जिसमें वे एक सघन और संवेदनशील कहानी लेकर आए हैं। इस कहानी में संगीत है, कला है, हास्य है और गुरु-गंभीर अहसास भी। एक स्तर पर यह कहानी प्यार के बारे में है - एक स्त्री का प्यार जो मिलकर खो जाती है, फिर मिलती है और फिर खो जाती है। विक्रम सेठ इस उपन्यास में पुनः जीवन के विभ्रम की रचना करते हैं। और सबसे ऊपर यह पुस्तक संगीत के बारे में है और इस बारे में कि कैसे संगीत का प्यार जीवन के बीचोबीच एक घनीभूत धारा की तरह प्रवहमान रहता है। तीखे दुख और दीप्तिमान मेधा की पुनरावृत्तियों के द्वारा यह उपन्यास विक्रम सेठ के लेखकीय व्यक्तित्व का एक अलग ही पहलू पाठक के सम्मुख खोलता है।
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Genres
No genres specified
Tags
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Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 2001
ISBN
ISBN-13: 9788126701261
ISBN-10: 8126701269
Language
Hindi
No. of Pages
443
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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