Kumar, Dr Dharmendra
Description
कई बार ज़िन्दगी बड़े नाखुश रंग दिखाती है, और कई बार पूरी ज़िन्दगी ही नाखुशी का रेगिस्तान नज़र आती है| एक ऐसा रेगिस्तान जिसके ओर-छोर का तो पहले ही पता नहीं
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होता; और दुःख, समाज के तंज, परिस्थितियों के शिकंजों के बवंडर अक्सर इस रेगिस्तान में हमारी ठोर बने रेत के टीले भी बहा ले जाते हैं| हम अक्सर इन क्षणिक टीलों के साथ एक अपनापन जोड़ लेते हैं, और ये भूल जाते हैं कि इनका साथ क्षण भर का है| इन बवंडरों, रेगिस्तान की तपन के बीच जलती जिंदगी को एक कारगर लक्ष्य कैसे राहत दे सकता है, कैसे उस रेगिस्तान में भी एक मरुद्यान उगा सकता है, को बयां करती है हमारी ये कहानी| देव और यास्मीन की ये कहानी उनके बेजोड़ और आदर्श प्रेम को बयां करती है, जो जिस्मानी ताल्लुकों से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों से जुड़ाव रखता है| ऐसा एक आदर्श प्रेम की कहानी जिसका एक उद्देश्य है, जो सार्थक है, सार विहीन नहीं| ये एक आदर्श प्रेम की कहानी है| एक ओर समाज के धर्म ओर जातियों को लेकर ऊलजलूल पैमानों पर खर्च होती मानवता की वेदना को प्रस्तुत करती है, तो दूसरी ओर प्यार किसी को पा लेना ही नहीं बल्कि उस प्यार को खोकर भी उस प्यार के लिए जीकर, उस प्यार के सपने में अपने प्रेम को जीवंत रखने का एक मार्मिक चित्रण भी करती है|
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